Thoughts on Overthinking
Overthinking का एक पक्ष ये है कि "बहुत ज्यादा सोचना" (Overthinking) अक्सर अकर्मण्यता (Insolence) से जुड़ा होता है। सीधी भाषा में कहा जाए तो इसका मुख्य खयाली पुलाव (Daydreaming) होता है। जिनके पास कर्म करने की इच्छा (Will) और दायरा (Scope) होता है वो अपने हिस्से का कर्म कर लेते है और फल (Result) का इंतजार करते है। जिन्हें कर्म करने की इच्छा नहीं होती या फिर जो बहुत स्वार्थी (Selfish) नजरिया रखते है वही बहुत सोच विचार करते है। पुनर्विचार (Reconsideration) की हद तक समझ आता है कि किसी भी कर्म को करने से पहले उसके प्रमुख सम्भावित परिणामों के बारे मे सोचना चाहिए। दूसरा नजरिया ये है कि ऐसे लोगों का आत्मविश्वास कमजोर होता है, वो अपने किए किसी कर्म पर भरोसा नहीं कर पाते। कम आत्मविश्वास होने के कई कारण होते है।जैसे - मजाकिया छवि बनना, गलत मित्र मंडली का होना, घरवालों की उपेक्षा का शिकार होना, सामाजिक कौशल (Social Skill) की कमी होना, Anxiety (चिंता) होना, कमजोर आर्थिक हालात, पूर्व के अनुभव आदि। अक्सर हम स्वअवधारणा मित्रगणों, प्रियजनों के मूल्यांकन के आधार पर बनाते है। ये तो ऐसा ही है, E...