Thoughts on Overthinking

Overthinking का एक पक्ष ये है कि "बहुत ज्यादा सोचना" (Overthinking) अक्सर अकर्मण्यता (Insolence) से जुड़ा होता है। सीधी भाषा में कहा जाए तो इसका मुख्य खयाली पुलाव (Daydreaming) होता है।
जिनके पास कर्म करने की इच्छा (Will) और दायरा (Scope) होता है वो अपने हिस्से का कर्म कर लेते है और फल (Result) का इंतजार करते है। जिन्हें कर्म करने की इच्छा नहीं होती या फिर जो बहुत स्वार्थी (Selfish) नजरिया रखते है वही बहुत सोच विचार करते है।
पुनर्विचार (Reconsideration) की हद तक समझ आता है कि किसी भी कर्म को करने से पहले उसके प्रमुख सम्भावित परिणामों के बारे मे सोचना चाहिए।

दूसरा नजरिया ये है कि ऐसे लोगों का आत्मविश्वास कमजोर होता है, वो अपने किए किसी कर्म पर भरोसा नहीं कर पाते।
कम आत्मविश्वास होने के कई कारण होते है।जैसे - मजाकिया छवि बनना, गलत मित्र मंडली का होना, घरवालों की उपेक्षा का शिकार होना, सामाजिक कौशल (Social Skill) की कमी होना, Anxiety (चिंता) होना, कमजोर आर्थिक हालात, पूर्व के अनुभव आदि।
अक्सर हम स्वअवधारणा मित्रगणों, प्रियजनों के मूल्यांकन के आधार पर बनाते है।
ये तो ऐसा ही है, Emotional है, रोंदू है, Confuse है, डरपोक है, किसी काम का नहीं, इसकी केसेट अटकी रहती है आदि टिप्पणियां किसी इंसान के आत्मविश्वास की कितनी धज्जियाँ उड़ाती है यह अकल्पनीय है।

सुझाव है कि

(1) अगर मित्रमंडली ऐसी हो जहां आपको मज़ाक का पात्र बना कर रख दिया हो तो कृपया करके उसे बदल ले, संवेदनहीन मित्र रखने से अच्छा आप किताबों, साहित्य, फ़िल्मों, गीत-कविताओं से मित्रता करे।

(2) अपनी Overthinking को अभिव्यक्त करे।
अगर किसी इंसान, रिश्ते के बारे में Overthinking हो रहीं हो तो शर्म-झिझक छोडकर उसी इंसान से विनम्रता से पूछ ले कि मेरे मन में अमुक विचार आ रहा है कृपया मार्गदर्शन कीजिए।
यकीन कीजिए मन की बाते करने से कभी रिश्ते नहीं टूटते।

(3) अगर Overthinking जीवन, केरियर संबंधी हो तो उसे किसी जानकार (Specialist) के साथ ही साझा कीजिए।
अथवा आप लिखने की आदत डालिए।
किसी भी समस्या को काग़ज़ पर लिखने से जीवन में स्पष्टता (Clarity) आती है।
कहते है ना कि सिर्फ लिखने मात्र से आधी समस्या हल हो जाती है।

(4) चूंकि Overthinking देश, दुनियां, सिनेमा, धर्म, राजनीति, खेलों से भी जुड़ी होती है इसीलिए इन्हें बिल्कुल अनदेखा कर दीजिए।
कौन मंत्री? कौन प्रधानमंत्री? किसकी सरकार? कौन ट्रॉफी उठा रहा है? किसकी शादी? किसका तलाक? कौनसा युद्ध?

ये सब वो विषय है जो सोचते ही मन को उद्विग्न कर देते है इसलिए इनके बारे मे सोचने से बचिए। ये सब आपके लिए नहीं है।

जिस विषय मे आप सीधे तौर पर कुछ परिवर्तन नहीं कर सकते, कुछ बदल नहीं सकते कृपया करके उस विषय के बारे मे मत सोचिए ये आपको अनर्गल तकलीफ देगा।


(5) Overthinker अक्सर अपने चिंताएँ, दुखड़े दूसरे लोगों के सामने बताते रहते है इसलिये कृपया हर किसी से गम्भीर बातचीत मत कीजिए। इससे लोगों ने बीच आपकी छवि नकारात्मक बनती है, लोग आपसे बचने लगते है। 


(6) अपने समकक्षों, हमउम्र लोगों से स्वयं से अधिक समझ की उम्मीद ना करे। वो भी जीवन की उन्हीं परेशानियों से दो चार हो रहे है जिनसे आप व्यथित है। अगर जीवन में कोई सुझाव, राय, मशविरा चाहिए तो किसी बड़े, अनुभवी इंसान के पास जाइए।


अगर आपको ये पढ़कर कुछ नया, कुछ भिन्न नजरिया मिला हो तो कृपया और लोगों के साथ इसे साझा कीजिए।

धन्यवाद 🙏🏻

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